vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 11: स्त्री पर्व
»
अध्याय 13: श्रीकृष्णका धृतराष्ट्रको फटकारकर उनका क्रोध शान्त करना और धृतराष्ट्रका पाण्डवोंको हृदयसे लगाना
»
श्लोक 6
श्लोक
11.13.6
राजा हि य: स्थिरप्रज्ञ: स्वयं दोषानवेक्षते।
देशकालविभागं च परं श्रेय: स विन्दति॥ ६॥
अनुवाद
जिस राजा की बुद्धि स्थिर है, जो स्वयं दोषों को देखता है और देश-काल के विभाजन को समझता है, वह परम कल्याण को प्राप्त होता है ॥6॥
'A king whose intellect is steady, who sees the faults himself and understands the division of time and space, he attains supreme welfare. ॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×