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mahabharat 11.13.6: जिस राजा की बुद्धि स्थिर है, जो स्वयं दोषों को देखता है और देश-काल के विभाजन को समझता है, वह परम कल्याण को प्राप्त होता है ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 11.13: श्रीकृष्णका धृतराष्ट्रको फटकारकर उनका क्रोध शान्त करना और धृतराष्ट्रका पाण्डवोंको हृदयसे लगाना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  11.13.6 
राजा हि य: स्थिरप्रज्ञ: स्वयं दोषानवेक्षते।
देशकालविभागं च परं श्रेय: स विन्दति॥ ६॥
 
 
अनुवाद
जिस राजा की बुद्धि स्थिर है, जो स्वयं दोषों को देखता है और देश-काल के विभाजन को समझता है, वह परम कल्याण को प्राप्त होता है ॥6॥
 
'A king whose intellect is steady, who sees the faults himself and understands the division of time and space, he attains supreme welfare. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)