श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 13: श्रीकृष्णका धृतराष्ट्रको फटकारकर उनका क्रोध शान्त करना और धृतराष्ट्रका पाण्डवोंको हृदयसे लगाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  11.13.2 
राजन्नधीता वेदास्ते शास्त्राणि विविधानि च।
श्रुतानि च पुराणानि राजधर्माश्च केवला:॥ २॥
 
 
अनुवाद
‘राजन्! आपने वेदों और नाना प्रकार के शास्त्रों का अध्ययन किया है। आपने समस्त पुराणों और राजनियमों का भी श्रवण किया है।॥2॥
 
‘King! You have studied the Vedas and various kinds of scriptures. You have also listened to all the Puranas and the rules of kingship.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)