श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 13: श्रीकृष्णका धृतराष्ट्रको फटकारकर उनका क्रोध शान्त करना और धृतराष्ट्रका पाण्डवोंको हृदयसे लगाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  11.13.16 
हतेषु पार्थिवेन्द्रेषु पुत्रेषु निहतेषु च।
पाण्डुपुत्रेषु वै शर्म प्रीतिश्चाप्यवतिष्ठते॥ १६॥
 
 
अनुवाद
"सम्पूर्ण राजाओं और मेरे अपने पुत्रों के मर जाने के बाद अब मेरा प्रेम और कल्याण इन पाण्डु पुत्रों पर ही निर्भर है।" ॥16॥
 
"After the death of all the kings and my own sons, my love and well-being are now dependent only on these sons of Pandu." ॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)