Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 11.12.30: अतः सर्वत्र शांति स्थापित करने के उद्देश्य से हमने जो कुछ किया है, कृपया उसका अनुमोदन करें। अपने मन को व्यर्थ ही दुखी न करें।॥30॥ | mahabharat अध्याय 11.12: पाण्डवोंका धृतराष्ट्रसे मिलना, धृतराष्ट्रके द्वारा भीमकी लोहमयी प्रतिमाका भंग होना और शोक करनेपर श्रीकृष्णका उन्हें समझाना । mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्माद् यत् कृतमस्माभिर्मन्यमानै: शमं प्रति।
अनुमन्यस्व तत् सर्वं मा च शोके मन: कृथा:॥ ३०॥
अनुवाद
अतः सर्वत्र शांति स्थापित करने के उद्देश्य से हमने जो कुछ किया है, कृपया उसका अनुमोदन करें। अपने मन को व्यर्थ ही दुखी न करें।॥30॥
‘Therefore, please approve of all the things that we have done with the objective of establishing peace everywhere. Do not make your mind sorrowful unnecessarily.’॥ 30॥
इति श्रीमहाभारते स्त्रीपर्वणि जलप्रदानिकपर्वणि आयसभीमभङ्गे द्वादशोऽध्याय:॥ १२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत स्त्रीपर्वके अन्तर्गत जलप्रदानिकपर्वमें भीमसेनकी लोहमयी प्रतिमाका भंग होनाविषयक बारहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥