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mahabharat 11.12.28: राजेन्द्र! तुम्हारा मन पुत्र के वियोग के शोक से व्यथित है और धर्म से विमुख हो गया है; इसीलिए तुम भीमसेन को मारना चाहते हो॥ 28॥   |   mahabharat अध्याय 11.12: पाण्डवोंका धृतराष्ट्रसे मिलना, धृतराष्ट्रके द्वारा भीमकी लोहमयी प्रतिमाका भंग होना और शोक करनेपर श्रीकृष्णका उन्हें समझाना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 12: पाण्डवोंका धृतराष्ट्रसे मिलना, धृतराष्ट्रके द्वारा भीमकी लोहमयी प्रतिमाका भंग होना और शोक करनेपर श्रीकृष्णका उन्हें समझाना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  11.12.28 
पुत्रशोकाभिसंतप्तं धर्मादपकृतं मन:।
तव राजेन्द्र तेन त्वं भीमसेनं जिघांससि॥ २८॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! तुम्हारा मन पुत्र के वियोग के शोक से व्यथित है और धर्म से विमुख हो गया है; इसीलिए तुम भीमसेन को मारना चाहते हो॥ 28॥
 
'Rajendra! Your mind is distressed by the grief of losing your son and has deviated from Dharma; that is why you want to kill Bhimasena.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)