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mahabharat 11.12.26: ‘जैसे यमराज के पास पहुँचकर कोई जीवित नहीं रह सकता, वैसे ही आपकी भुजाओं में फँसकर कोई भी जीवित नहीं रह सकता।॥26॥   |   mahabharat अध्याय 11.12: पाण्डवोंका धृतराष्ट्रसे मिलना, धृतराष्ट्रके द्वारा भीमकी लोहमयी प्रतिमाका भंग होना और शोक करनेपर श्रीकृष्णका उन्हें समझाना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 12: पाण्डवोंका धृतराष्ट्रसे मिलना, धृतराष्ट्रके द्वारा भीमकी लोहमयी प्रतिमाका भंग होना और शोक करनेपर श्रीकृष्णका उन्हें समझाना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  11.12.26 
यथान्तकमनुप्राप्य जीवन् कश्चिन्न मुच्यते।
एवं बाह्वन्तरं प्राप्य तव जीवेन्न कश्चन॥ २६॥
 
 
अनुवाद
‘जैसे यमराज के पास पहुँचकर कोई जीवित नहीं रह सकता, वैसे ही आपकी भुजाओं में फँसकर कोई भी जीवित नहीं रह सकता।॥26॥
 
‘Just as no one can survive after reaching Yamraj, similarly no one can survive after getting caught between your arms.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)