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mahabharat 11.12.24: हे भरतश्रेष्ठ! यह जानकर कि तुम क्रोध में डूबे हुए हो, मैंने मृत्यु के मुख में फंसे हुए कुन्तीपुत्र भीमसेन को वापस खींच लिया।   |   mahabharat अध्याय 11.12: पाण्डवोंका धृतराष्ट्रसे मिलना, धृतराष्ट्रके द्वारा भीमकी लोहमयी प्रतिमाका भंग होना और शोक करनेपर श्रीकृष्णका उन्हें समझाना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 12: पाण्डवोंका धृतराष्ट्रसे मिलना, धृतराष्ट्रके द्वारा भीमकी लोहमयी प्रतिमाका भंग होना और शोक करनेपर श्रीकृष्णका उन्हें समझाना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  11.12.24 
त्वां क्रोधवशमापन्नं विदित्वा भरतर्षभ।
मयापकृष्ट: कौन्तेयो मृत्योर्दंष्ट्रान्तरं गत:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! यह जानकर कि तुम क्रोध में डूबे हुए हो, मैंने मृत्यु के मुख में फंसे हुए कुन्तीपुत्र भीमसेन को वापस खींच लिया।
 
'Best of the Bharatas! Knowing that you were overcome by anger, I pulled back Bhimasena, the son of Kunti, who was caught in the jaws of death.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)