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mahabharat 11.12.18: यद्यपि राजा धृतराष्ट्र में दस हजार हाथियों का बल था, फिर भी भीम की लोहे की मूर्ति को तोड़ देने पर उनकी छाती में दर्द होने लगा और उनके मुख से रक्त बहने लगा॥18॥   |   mahabharat अध्याय 11.12: पाण्डवोंका धृतराष्ट्रसे मिलना, धृतराष्ट्रके द्वारा भीमकी लोहमयी प्रतिमाका भंग होना और शोक करनेपर श्रीकृष्णका उन्हें समझाना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 12: पाण्डवोंका धृतराष्ट्रसे मिलना, धृतराष्ट्रके द्वारा भीमकी लोहमयी प्रतिमाका भंग होना और शोक करनेपर श्रीकृष्णका उन्हें समझाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  11.12.18 
नागायुतबलप्राण: स राजा भीममायसम्।
भङ्‍‍क्‍त्‍वा विमथितोरस्क: सुस्राव रुधिरं मुखात्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि राजा धृतराष्ट्र में दस हजार हाथियों का बल था, फिर भी भीम की लोहे की मूर्ति को तोड़ देने पर उनकी छाती में दर्द होने लगा और उनके मुख से रक्त बहने लगा॥18॥
 
Even though King Dhritarashtra had the strength of ten thousand elephants, after breaking the iron statue of Bhima, his chest was ached and blood began to flow from his mouth.॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)