श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 12: पाण्डवोंका धृतराष्ट्रसे मिलना, धृतराष्ट्रके द्वारा भीमकी लोहमयी प्रतिमाका भंग होना और शोक करनेपर श्रीकृष्णका उन्हें समझाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  11.12.14 
स कोपपावकस्तस्य शोकवायुसमीरित:।
भीमसेनमयं दावं दिधक्षुरिव दृश्यते॥ १४॥
 
 
अनुवाद
शोकरूपी वायु से प्रज्वलित उनकी क्रोधाग्नि ऐसी प्रतीत हो रही थी मानो भीमसेन के वन को जलाकर राख कर देना चाहती हो ॥14॥
 
His angry fire, fanned by the wind of grief, looked as if it wanted to burn down the forest of Bhimasena to ashes. ॥14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)