vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 11: स्त्री पर्व
»
अध्याय 12: पाण्डवोंका धृतराष्ट्रसे मिलना, धृतराष्ट्रके द्वारा भीमकी लोहमयी प्रतिमाका भंग होना और शोक करनेपर श्रीकृष्णका उन्हें समझाना
»
श्लोक 14
श्लोक
11.12.14
स कोपपावकस्तस्य शोकवायुसमीरित:।
भीमसेनमयं दावं दिधक्षुरिव दृश्यते॥ १४॥
अनुवाद
शोकरूपी वायु से प्रज्वलित उनकी क्रोधाग्नि ऐसी प्रतीत हो रही थी मानो भीमसेन के वन को जलाकर राख कर देना चाहती हो ॥14॥
His angry fire, fanned by the wind of grief, looked as if it wanted to burn down the forest of Bhimasena to ashes. ॥14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×