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mahabharat 11.12.12: पुत्र के वध से दुःखी हुए पिता ने अपने पुत्रों का वध करने वाले पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर को अपनी बाहों में भर लिया; परन्तु उस समय उनका मन प्रसन्न नहीं हुआ ॥12॥   |   mahabharat अध्याय 11.12: पाण्डवोंका धृतराष्ट्रसे मिलना, धृतराष्ट्रके द्वारा भीमकी लोहमयी प्रतिमाका भंग होना और शोक करनेपर श्रीकृष्णका उन्हें समझाना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 12: पाण्डवोंका धृतराष्ट्रसे मिलना, धृतराष्ट्रके द्वारा भीमकी लोहमयी प्रतिमाका भंग होना और शोक करनेपर श्रीकृष्णका उन्हें समझाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  11.12.12 
तमात्मजान्तकरणं पिता पुत्रवधार्दित:।
अप्रीयमाण: शोकार्त: पाण्डवं परिषस्वजे॥ १२॥
 
 
अनुवाद
पुत्र के वध से दुःखी हुए पिता ने अपने पुत्रों का वध करने वाले पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर को अपनी बाहों में भर लिया; परन्तु उस समय उनका मन प्रसन्न नहीं हुआ ॥12॥
 
The father, pained by the killing of his son, embraced Yudhishthira, the son of Pandu, who had killed his sons, in his arms; but his mind was not happy at that time. ॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)