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mahabharat 11.10.6: विदुरजी ने सभी स्त्रियों को सांत्वना दी। वे स्वयं उनसे भी अधिक व्यथित थे। आँसुओं से रुँधे हुए गले से उन्होंने सबको रथ पर बिठाया और नगर से बाहर चले गए।   |   mahabharat अध्याय 11.10: स्त्रियों और प्रजाके लोगोंके सहित राजा धृतराष्ट्रका रणभूमिमें जानेके लिये नगरसे बाहर निकलना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 10: स्त्रियों और प्रजाके लोगोंके सहित राजा धृतराष्ट्रका रणभूमिमें जानेके लिये नगरसे बाहर निकलना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  11.10.6 
ता: समाश्वासयत् क्षत्ता ताभ्यश्चार्ततर: स्वयम्।
अश्रुकण्ठी: समारोप्य ततोऽसौ निर्ययौ पुरात्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
विदुरजी ने सभी स्त्रियों को सांत्वना दी। वे स्वयं उनसे भी अधिक व्यथित थे। आँसुओं से रुँधे हुए गले से उन्होंने सबको रथ पर बिठाया और नगर से बाहर चले गए।
 
Vidurji consoled all the women. He himself was more distressed than them. With his throat choked with tears, he put them all on the chariot and left the city.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)