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श्लोक  11.10.3 
एवमुक्त्वा स धर्मात्मा विदुरं धर्मवित्तमम्।
शोकविप्रहतज्ञानो यानमेवान्वपद्यत॥ ३॥
 
 
अनुवाद
धर्म के महान विद्वान विदुर से ऐसा कहकर, धर्मात्मा राजा धृतराष्ट्र, जिनकी ज्ञान-शक्ति शोक के कारण लगभग लुप्त हो चुकी थी, अपने रथ पर सवार हुए।
 
Having said this to Vidur, the great scholar of Dharma, the righteous King Dhritarashtra, whose powers of knowledge had almost vanished due to grief, mounted his chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)