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श्लोक  11.10.1 
वैशम्पायन उवाच
विदुरस्य तु तद् वाक्यं श्रुत्वा तु पुरुषर्षभ:।
युज्यतां यानमित्युक्त्वा पुनर्वचनमब्रवीत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- राजन! विदुर के ये वचन सुनकर पुरुषों में श्रेष्ठ राजा धृतराष्ट्र ने उन्हें रथ जोतने की आज्ञा दी और पुनः इस प्रकार कहा॥1॥
 
Vaishampayanji says- Rajan! Hearing these words of Vidur, King Dhritarashtra, the best of men, ordered him to plow the chariot and again said thus. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)