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mahabharat 11.1.43: ये शोकरूपी आँसू अग्नि की चिनगारियों के समान हैं, जो निस्संदेह इन लोगों को जला डालती हैं; इसलिए शोक का त्याग कर दो और बुद्धि के बल से अपने मन को स्थिर करो॥ 43॥   |   mahabharat अध्याय 11.1: धृतराष्ट्रका विलाप और संजयका उनको सान्त्वना देना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 1: धृतराष्ट्रका विलाप और संजयका उनको सान्त्वना देना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  11.1.43 
विस्फुलिङ्गा इव ह्येतान् दहन्ति किल मानवान्।
जहीहि मन्युं बुद्धॺा वै धारयात्मानमात्मना॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
ये शोकरूपी आँसू अग्नि की चिनगारियों के समान हैं, जो निस्संदेह इन लोगों को जला डालती हैं; इसलिए शोक का त्याग कर दो और बुद्धि के बल से अपने मन को स्थिर करो॥ 43॥
 
"These tears of grief are like sparks of fire which undoubtedly burn these people; therefore, give up grief and steady your mind by the power of wisdom." ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)