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mahabharat 11.1.38: ‘शोक करनेवाला मनुष्य अपनी इच्छित वस्तुएँ नहीं पाता, शोक से युक्त मनुष्य किसी भी फल को प्राप्त नहीं कर सकता। शोक करनेवाला मनुष्य न तो धन को प्राप्त करता है और न ही भगवान को॥38॥   |   mahabharat अध्याय 11.1: धृतराष्ट्रका विलाप और संजयका उनको सान्त्वना देना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 1: धृतराष्ट्रका विलाप और संजयका उनको सान्त्वना देना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  11.1.38 
अर्थान्न शोचन् प्राप्नोति न शोचन् विन्दते फलम्।
न शोचन् श्रियमाप्नोति न शोचन् विन्दते परम्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
‘शोक करनेवाला मनुष्य अपनी इच्छित वस्तुएँ नहीं पाता, शोक से युक्त मनुष्य किसी भी फल को प्राप्त नहीं कर सकता। शोक करनेवाला मनुष्य न तो धन को प्राप्त करता है और न ही भगवान को॥38॥
 
‘A person who grieves does not get the things he desires, a person who is full of grief cannot achieve any fruit. A person who grieves neither attains wealth nor God.॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)