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mahabharat 11.1.28-30: महाराज! महान हथियार! भरतनन्दन! आपके पुत्र ने कुरुकुल के बुद्धिमान बुजुर्गों, भीष्म, गांधारी, विदुर, द्रोणाचार्य, शरद्वान के पुत्र कृपाचार्य, श्रीकृष्ण, बुद्धिमान देवर्षि नारद, अमित-तेजस्वी वेदव्यास और अन्य महान ऋषियों की बात नहीं मानी। 28-30॥   |   mahabharat अध्याय 11.1: धृतराष्ट्रका विलाप और संजयका उनको सान्त्वना देना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 1: धृतराष्ट्रका विलाप और संजयका उनको सान्त्वना देना  »  श्लोक 28-30
 
 
श्लोक  11.1.28-30 
कुरुवृद्धस्य भीष्मस्य गान्धार्या विदुरस्य च॥ २८॥
द्रोणस्य च महाराज कृपस्य च शरद्वत:।
कृष्णस्य च महाबाहो नारदस्य च धीमत:॥ २९॥
ऋषीणां च तथान्येषां व्यासस्यामिततेजस:।
न कृतं तेन वचनं तव पुत्रेण भारत॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
महाराज! महान हथियार! भरतनन्दन! आपके पुत्र ने कुरुकुल के बुद्धिमान बुजुर्गों, भीष्म, गांधारी, विदुर, द्रोणाचार्य, शरद्वान के पुत्र कृपाचार्य, श्रीकृष्ण, बुद्धिमान देवर्षि नारद, अमित-तेजस्वी वेदव्यास और अन्य महान ऋषियों की बात नहीं मानी। 28-30॥
 
'Maharaj! Great arms! Bharatnandan! Your son did not listen to the wise elders of Kurukula, Bhishma, Gandhari, Vidur, Dronacharya, Sharadvan's son Kripacharya, Shri Krishna, intelligent devarshi Narad, amit-tejaswi Vedvyas and other great sages. 28-30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)