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न कृतं सुहृदां वाक्यं जामदग्न्यस्य जल्पत:।
नारदस्य च देवर्षे: कृष्णद्वैपायनस्य च॥ १३॥
अनुवाद
मैंने अपने मित्रों की सलाह नहीं मानी। जमदग्निपुत्र परशुराम, ऋषि नारद और श्रीकृष्ण द्वैपायन व्यास, सभी ने मुझे अच्छा करने की सलाह दी, लेकिन मैंने किसी की नहीं सुनी।
I did not listen to the advice of my friends. Jamadagni's son Parashurama, sage Narada and Sri Krishna Dwaipayana Vyasa all advised me to do good, but I did not listen to anyone.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥