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श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 1: धृतराष्ट्रका विलाप और संजयका उनको सान्त्वना देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  11.1.10 
धृतराष्ट्र उवाच
हतपुत्रो हतामात्यो हतसर्वसुहृज्जन:।
दु:खं नूनं भविष्यामि विचरन् पृथिवीमिमाम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले- संजय! मेरे पुत्र, मंत्री और सभी मित्र मारे जा चुके हैं। अब मैं अवश्य ही इस पृथ्वी पर भटकूँगा और केवल दुःख ही भोगूँगा।
 
Dhritarashtra said- Sanjay! My sons, ministers and all my friends have been killed. Now I will surely wander on this earth and suffer nothing but pain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)