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श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 9: दुर्योधनकी दशा देखकर कृपाचार्य और अश्वत्थामाका विलाप तथा उनके मुखसे पांचालोंके वधका वृत्तान्त जानकर दुर्योधनका प्रसन्न होकर प्राणत्याग करना  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  10.9.63 
वैशम्पायन उवाच
इति श्रुत्वा स नृपति: पुत्रस्य निधनं तदा।
नि:श्वस्य दीर्घमुष्णं च ततश्चिन्तापरोऽभवत्॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: हे राजन! अपने पुत्र की मृत्यु का समाचार सुनकर राजा धृतराष्ट्र ने गहरी साँस ली और गहरी चिंता में डूब गए।
 
Vaishmpayana says: O King! On hearing the news of his son's death, King Dhritarashtra took a deep breath and became immersed in deep worry. 63.
 
इति श्रीमहाभारते सौप्तिकपर्वणि दुर्योधनप्राणत्यागे नवमोऽध्याय:॥ ९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सौप्तिकपर्वमें दुर्योधनका प्राणत्यागविषयक नवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)