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mahabharat 10.9.56-57: तुम सबका कल्याण हो। तुम सुख प्राप्त करो। अब हम स्वर्ग में पुनः मिलेंगे।' ऐसा कहकर महाहृदयी और वीर कुरुराज दुर्योधन मौन हो गया और अपने मित्रों के लिए शोक छोड़कर प्राण त्याग दिए। वह स्वयं तो पवित्र स्वर्ग को चला गया; किन्तु उसका नश्वर शरीर इस पृथ्वी पर पड़ा रहा। 56-57   |   mahabharat अध्याय 10.9: दुर्योधनकी दशा देखकर कृपाचार्य और अश्वत्थामाका विलाप तथा उनके मुखसे पांचालोंके वधका वृत्तान्त जानकर दुर्योधनका प्रसन्न होकर प्राणत्याग करना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 9: दुर्योधनकी दशा देखकर कृपाचार्य और अश्वत्थामाका विलाप तथा उनके मुखसे पांचालोंके वधका वृत्तान्त जानकर दुर्योधनका प्रसन्न होकर प्राणत्याग करना  »  श्लोक 56-57
 
 
श्लोक  10.9.56-57 
स्वस्ति प्राप्नुत भद्रं व: स्वर्गे न: संगम: पुन:।
इत्येवमुक्त्वा तूष्णीं स कुरुराजो महामना:॥ ५६॥
प्राणानुपासृजद् वीर: सुहृदां दु:खमुत्सृजन्।
अपाक्रामद् दिवं पुण्यां शरीरं क्षितिमाविशत्॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
तुम सबका कल्याण हो। तुम सुख प्राप्त करो। अब हम स्वर्ग में पुनः मिलेंगे।' ऐसा कहकर महाहृदयी और वीर कुरुराज दुर्योधन मौन हो गया और अपने मित्रों के लिए शोक छोड़कर प्राण त्याग दिए। वह स्वयं तो पवित्र स्वर्ग को चला गया; किन्तु उसका नश्वर शरीर इस पृथ्वी पर पड़ा रहा। 56-57
 
May you all be blessed. May you attain happiness. Now we will be reunited in heaven.' Saying this, the great-hearted and brave Kuru king Duryodhana became silent and left sorrow for his friends and gave up his life. He himself went to the holy heaven; but his mortal body remained lying on this earth. 56-57.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)