श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 9: दुर्योधनकी दशा देखकर कृपाचार्य और अश्वत्थामाका विलाप तथा उनके मुखसे पांचालोंके वधका वृत्तान्त जानकर दुर्योधनका प्रसन्न होकर प्राणत्याग करना  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  10.9.55 
स च सेनापति: क्षुद्रो हत: सार्धं शिखण्डिना।
तेन मन्ये मघवता सममात्मानमद्य वै॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
वह नीच सेनापति धृष्टद्युम्न शिखण्डीसहित मारा गया, इस कारण मैं आज अपने को इन्द्र के समान मानता हूँ ॥55॥
 
That despicable commander Dhrishtadyumna along with Shikhandi was killed, because of this I certainly consider myself equal to Indra today. 55॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)