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mahabharat 10.9.52: राजन! मैंने स्वयं रात्रि के समय शिविर में प्रवेश किया और पापी धृष्टद्युम्न को पशु के समान गला घोंटकर मार डाला॥52॥   |   mahabharat अध्याय 10.9: दुर्योधनकी दशा देखकर कृपाचार्य और अश्वत्थामाका विलाप तथा उनके मुखसे पांचालोंके वधका वृत्तान्त जानकर दुर्योधनका प्रसन्न होकर प्राणत्याग करना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 9: दुर्योधनकी दशा देखकर कृपाचार्य और अश्वत्थामाका विलाप तथा उनके मुखसे पांचालोंके वधका वृत्तान्त जानकर दुर्योधनका प्रसन्न होकर प्राणत्याग करना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  10.9.52 
मया च पापकर्मासौ धृष्टद्युम्नो महीपते।
प्रविश्य शिबिरं रात्रौ पशुमारेण मारित:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
राजन! मैंने स्वयं रात्रि के समय शिविर में प्रवेश किया और पापी धृष्टद्युम्न को पशु के समान गला घोंटकर मार डाला॥52॥
 
King! I myself entered the camp at night and killed the sinful Dhrishtadyumna by strangling him like an animal.'॥ 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)