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mahabharat 10.9.49: वहाँ पाँचों पाण्डव भाई श्रीकृष्ण और सात्यकि बचे हैं और यहाँ मैं, कृतवर्मा और शरद्वान के पुत्र कृपाचार्य बचे हैं॥ 49॥   |   mahabharat अध्याय 10.9: दुर्योधनकी दशा देखकर कृपाचार्य और अश्वत्थामाका विलाप तथा उनके मुखसे पांचालोंके वधका वृत्तान्त जानकर दुर्योधनका प्रसन्न होकर प्राणत्याग करना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 9: दुर्योधनकी दशा देखकर कृपाचार्य और अश्वत्थामाका विलाप तथा उनके मुखसे पांचालोंके वधका वृत्तान्त जानकर दुर्योधनका प्रसन्न होकर प्राणत्याग करना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  10.9.49 
ते चैव भ्रातर: पञ्च वासुदेवोऽथ सात्यकि:।
अहं च कृतवर्मा च कृप: शारद्वतस्तथा॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
वहाँ पाँचों पाण्डव भाई श्रीकृष्ण और सात्यकि बचे हैं और यहाँ मैं, कृतवर्मा और शरद्वान के पुत्र कृपाचार्य बचे हैं॥ 49॥
 
There the five Pandava brothers, Shri Krishna and Satyaki are left and here I, Kritavarma and Sharadwan's son Kripacharya are left.॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)