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mahabharat 10.9.42-43h: महाराज! आपसे वियोग में हमें सुख-शांति कैसे मिलेगी? हे राजन! जब आप स्वर्ग में जाकर समस्त महारथियों से मिलेंगे, तो कृपया मेरी ओर से उनकी आयु के अनुसार उनका सम्मान करें।   |   mahabharat अध्याय 10.9: दुर्योधनकी दशा देखकर कृपाचार्य और अश्वत्थामाका विलाप तथा उनके मुखसे पांचालोंके वधका वृत्तान्त जानकर दुर्योधनका प्रसन्न होकर प्राणत्याग करना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 9: दुर्योधनकी दशा देखकर कृपाचार्य और अश्वत्थामाका विलाप तथा उनके मुखसे पांचालोंके वधका वृत्तान्त जानकर दुर्योधनका प्रसन्न होकर प्राणत्याग करना  »  श्लोक 42-43h
 
 
श्लोक  10.9.42-43h 
हीनानां नस्त्वया राजन् कुत: शान्ति: कुत: सुखम्।
गत्वैव तु महाराज समेत्य च महारथान्॥ ४२॥
यथाज्येष्ठं यथाश्रेष्ठं पूजयेर्वचनान्मम।
 
 
अनुवाद
महाराज! आपसे वियोग में हमें सुख-शांति कैसे मिलेगी? हे राजन! जब आप स्वर्ग में जाकर समस्त महारथियों से मिलेंगे, तो कृपया मेरी ओर से उनकी आयु के अनुसार उनका सम्मान करें।
 
‘Maharaj! How can we find peace and happiness if we are separated from you? O King! When you go to heaven and meet all the great warriors, please honour them on my behalf in the order of their age. 42 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)