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mahabharat 10.9.39-40: हे राजन! जब आप परम गति को जा रहे हैं, तब हम तीनों आपके पीछे-पीछे नहीं जाएँगे, इसलिए हम स्वर्ग और धन दोनों से वंचित हो जाएँगे और आपके पुण्यकर्मों का स्मरण करते हुए दिन-रात शोक की अग्नि में जलते रहेंगे॥ 39-40॥   |   mahabharat अध्याय 10.9: दुर्योधनकी दशा देखकर कृपाचार्य और अश्वत्थामाका विलाप तथा उनके मुखसे पांचालोंके वधका वृत्तान्त जानकर दुर्योधनका प्रसन्न होकर प्राणत्याग करना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 9: दुर्योधनकी दशा देखकर कृपाचार्य और अश्वत्थामाका विलाप तथा उनके मुखसे पांचालोंके वधका वृत्तान्त जानकर दुर्योधनका प्रसन्न होकर प्राणत्याग करना  »  श्लोक 39-40
 
 
श्लोक  10.9.39-40 
वयमेव त्रयो राजन् गच्छन्तं परमां गतिम्॥ ३९॥
यद् वै त्वां नानुगच्छामस्तेन धक्ष्यामहे वयम्।
तत् स्वर्गहीना हीनार्था: स्मरन्त: सुकृतस्य ते॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! जब आप परम गति को जा रहे हैं, तब हम तीनों आपके पीछे-पीछे नहीं जाएँगे, इसलिए हम स्वर्ग और धन दोनों से वंचित हो जाएँगे और आपके पुण्यकर्मों का स्मरण करते हुए दिन-रात शोक की अग्नि में जलते रहेंगे॥ 39-40॥
 
O King! Since we three are not following you while you are going to the ultimate destination, we will be deprived of both heaven and wealth and will keep burning in the fire of grief day and night, remembering your good deeds.॥ 39-40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)