श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 9: दुर्योधनकी दशा देखकर कृपाचार्य और अश्वत्थामाका विलाप तथा उनके मुखसे पांचालोंके वधका वृत्तान्त जानकर दुर्योधनका प्रसन्न होकर प्राणत्याग करना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  10.9.28 
यां गतिं क्षत्रियस्याहु: प्रशस्तां परमर्षय:।
हतस्याभिमुखस्याजौ प्राप्तस्त्वमसि तां गतिम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
तुमने वह उत्तम गति प्राप्त कर ली है जो युद्ध में शत्रुओं का सामना करते हुए मारे गए क्षत्रिय के लिए महर्षियों ने निर्धारित की है।॥ 28॥
 
You have attained the best fate that the great sages have prescribed for a Kshatriya who is killed while facing the enemy in a war.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)