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mahabharat 10.9.24: एक तो युद्धभूमि में अन्यायपूर्वक तुम्हारा वध किया गया। दूसरे, भीमसेन ने तुम्हारे सिर पर लात मारी। इतना सब होने पर भी जिन लोगों ने उस नीच व्यक्ति की उपेक्षा की और उसे दण्ड नहीं दिया, उन श्रीकृष्ण और युधिष्ठिर को धिक्कार है!   |   mahabharat अध्याय 10.9: दुर्योधनकी दशा देखकर कृपाचार्य और अश्वत्थामाका विलाप तथा उनके मुखसे पांचालोंके वधका वृत्तान्त जानकर दुर्योधनका प्रसन्न होकर प्राणत्याग करना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 9: दुर्योधनकी दशा देखकर कृपाचार्य और अश्वत्थामाका विलाप तथा उनके मुखसे पांचालोंके वधका वृत्तान्त जानकर दुर्योधनका प्रसन्न होकर प्राणत्याग करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  10.9.24 
अधर्मेण हतस्याजौ मृद्यमानं पदा शिर:।
य उपेक्षितवान् क्षुद्रं धिक् कृष्णं धिग् युधिष्ठिरम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
एक तो युद्धभूमि में अन्यायपूर्वक तुम्हारा वध किया गया। दूसरे, भीमसेन ने तुम्हारे सिर पर लात मारी। इतना सब होने पर भी जिन लोगों ने उस नीच व्यक्ति की उपेक्षा की और उसे दण्ड नहीं दिया, उन श्रीकृष्ण और युधिष्ठिर को धिक्कार है!
 
‘First of all you were killed unjustly on the battlefield. Secondly Bhimsena kicked you on the head. Despite all this those who ignored that lowly person and did not punish him, shame on those Shri Krishna and Yudhishthira!
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)