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mahabharat 10.8.97-98h: जब अँधेरा छा गया, तो सब लोग हतप्रभ हो गए। उस समय पिता पुत्रों को और भाई भाईयों को नहीं पहचान पा रहे थे। 97 1/2   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 97-98h
 
 
श्लोक  10.8.97-98h 
तस्मिंस्तमसि संजाते प्रमूढा: सर्वतो जना:॥ ९७॥
नाजानन् पितर: पुत्रान् भ्रातॄन् भ्रातर एव च।
 
 
अनुवाद
जब अँधेरा छा गया, तो सब लोग हतप्रभ हो गए। उस समय पिता पुत्रों को और भाई भाईयों को नहीं पहचान पा रहे थे। 97 1/2
 
When the darkness spread, everyone was bewildered. At that time, fathers could not recognize sons and brothers could not recognize brothers. 97 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)