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mahabharat 10.8.96-97h: दौड़ते हुए घोड़ों और हाथियों के पैरों से उड़ती धूल से पाण्डव शिविर में रात्रि का अंधकार द्विगुणित हो गया।   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 96-97h
 
 
श्लोक  10.8.96-97h 
तैस्तत्र परिधावद्भिश्चरणोदीरितं रज:॥ ९६॥
अकरोच्छिबिरे तेषां रजन्यां द्विगुणं तम:।
 
 
अनुवाद
दौड़ते हुए घोड़ों और हाथियों के पैरों से उड़ती धूल से पाण्डव शिविर में रात्रि का अंधकार द्विगुणित हो गया।
 
The dust raised by the feet of those running horses and elephants doubled the darkness of the night in the Pandava camp. 96 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)