श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 94-95h
 
 
श्लोक  10.8.94-95h 
स शब्द: पूरितो राजन् भूतसंघैर्मुदायुतै:॥ ९४॥
अपूरयद् दिश: सर्वा दिवं चातिमहान् स्वन:।
 
 
अनुवाद
राजन! प्रसन्नचित्त भूतों का वह महान् शब्द समस्त दिशाओं में तथा आकाश में गूंज उठा। 94 1/2॥
 
Rajan! That great noise made by the joyous ghosts echoed in all directions and in the sky. 94 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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