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mahabharat 10.8.93-94h: हे महापुरुष! हे भरतश्रेष्ठ! जब इस प्रकार नरसंहार हो रहा था, तब हर्ष में भरकर राक्षस बड़े जोर से गर्जना करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 93-94h
 
 
श्लोक  10.8.93-94h 
तस्मिंस्तथा वर्तमाने रक्षांसि पुरुषर्षभ॥ ९३॥
हृष्टानि व्यनदन्नुच्चैर्मुदा भरतसत्तम।
 
 
अनुवाद
हे महापुरुष! हे भरतश्रेष्ठ! जब इस प्रकार नरसंहार हो रहा था, तब हर्ष में भरकर राक्षस बड़े जोर से गर्जना करने लगे।
 
O great man! O best of the Bharatas! When the carnage was going on like this, the demons filled with joy roared very loudly. 93 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)