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mahabharat 10.8.92-93h: बहुत से योद्धा डर के मारे भूमि पर छिप गए। भागते हुए घोड़ों और हाथियों ने उन्हें पैरों तले रौंद डाला।   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 92-93h
 
 
श्लोक  10.8.92-93h 
तत्र केचिन्नरा भीता व्यलीयन्त महीतले॥ ९२॥
तथैव तान् निपतितानपिंषन् गजवाजिन:।
 
 
अनुवाद
बहुत से योद्धा डर के मारे भूमि पर छिप गए। भागते हुए घोड़ों और हाथियों ने उन्हें पैरों तले रौंद डाला।
 
Many warriors were lying hidden on the ground in fear. The fleeing horses and elephants trampled them under their feet. 92 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)