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mahabharat 10.8.91-92h: बहुत से लोग शौच करने लगे। बहुत से लोग पेशाब करने लगे। राजेन्द्र! बहुत से घोड़े और हाथी भी बंधनों से मुक्त होकर उसी समय चारों दिशाओं में भागने लगे, जिससे लोगों को बड़ी परेशानी हुई।   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 91-92h
 
 
श्लोक  10.8.91-92h 
पुरीषमसृजन् केचित् केचिन्मूत्रं प्रसुस्रुवु:।
बन्धनानि च राजेन्द्र संच्छिद्य तुरगा द्विपा:॥ ९१॥
समं पर्यपतंश्चान्ये कुर्वन्तो महदाकुलम्।
 
 
अनुवाद
बहुत से लोग शौच करने लगे। बहुत से लोग पेशाब करने लगे। राजेन्द्र! बहुत से घोड़े और हाथी भी बंधनों से मुक्त होकर उसी समय चारों दिशाओं में भागने लगे, जिससे लोगों को बड़ी परेशानी हुई।
 
Many started defecating. Many started urinating. Rajendra! Many other horses and elephants broke free from the bonds and started running in all directions at the same time, causing great distress to the people.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)