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mahabharat 10.8.90: अन्य अनेक योद्धा केश बिखरे हुए भाग रहे थे। उस अवस्था में वे एक-दूसरे को पहचान नहीं पा रहे थे। कुछ तो उछलते हुए दौड़ते और थककर गिर पड़ते और कुछ एक ही स्थान पर चक्कर लगाते रहते थे॥90॥   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  10.8.90 
विमुक्तकेशाश्चाप्यन्ये नाभ्यजानन् परस्परम्।
उत्पतन्तोऽपतन् श्रान्ता: केचित् तत्राभ्रमंस्तदा॥ ९०॥
 
 
अनुवाद
अन्य अनेक योद्धा केश बिखरे हुए भाग रहे थे। उस अवस्था में वे एक-दूसरे को पहचान नहीं पा रहे थे। कुछ तो उछलते हुए दौड़ते और थककर गिर पड़ते और कुछ एक ही स्थान पर चक्कर लगाते रहते थे॥90॥
 
Many other warriors ran with their hair dishevelled. In that condition they were not able to recognise each other. Some would run jumping and fall down out of exhaustion and some would keep circling in the same place.॥90॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)