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mahabharat 10.8.88: हे राजन! युद्ध के शोर से, जो योद्धा नींद में अचेत पड़े थे, वे आश्चर्य से उछल पड़ते और भयभीत होकर इधर-उधर भागने लगते।   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  10.8.88 
उत्पेतुस्तेन शब्देन योधा राजन् विचेतस:।
निद्रार्ताश्च भयार्ताश्च व्यधावन्त ततस्तत:॥ ८८॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! युद्ध के शोर से, जो योद्धा नींद में अचेत पड़े थे, वे आश्चर्य से उछल पड़ते और भयभीत होकर इधर-उधर भागने लगते।
 
O King! With the noise of the fighting, the warriors who were lying unconscious in their sleep would jump up in surprise and start running here and there in terror.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)