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mahabharat 10.8.86: इसके बाद वह सौ अर्धचंद्राकार चिह्नों वाली एक विचित्र ढाल और आकाश के रंग की एक चमकती हुई तलवार लेकर सभी दिशाओं में घूमने लगा।   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  10.8.86 
पुनश्च सुविचित्रेण शतचन्द्रेण चर्मणा।
तेन चाकाशवर्णेन तथाचरत सोऽसिना॥ ८६॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद वह सौ अर्धचंद्राकार चिह्नों वाली एक विचित्र ढाल और आकाश के रंग की एक चमकती हुई तलवार लेकर सभी दिशाओं में घूमने लगा।
 
Thereafter he began to wander in all directions, carrying a strange shield bearing a hundred crescent-shaped marks and a gleaming sword of the colour of the sky.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)