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mahabharat 10.8.83: इसके बाद द्रोणपुत्र अश्वत्थामा पुनः भयंकर ध्वनि करता हुआ अपने रथ पर सवार हुआ और हाथ में धनुष लेकर अपने बाणों द्वारा अन्य योद्धाओं को यमलोक भेजने लगा।   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  10.8.83 
ततो रथं पुनर्द्रौणिरास्थितो भीमनि:स्वनम्।
धनुष्पाणि: शरैरन्यान् प्रैषयद् वै यमक्षयम्॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद द्रोणपुत्र अश्वत्थामा पुनः भयंकर ध्वनि करता हुआ अपने रथ पर सवार हुआ और हाथ में धनुष लेकर अपने बाणों द्वारा अन्य योद्धाओं को यमलोक भेजने लगा।
 
After this, Drona's son Ashwatthama once again mounted his chariot making a terrifying sound and taking up his bow in his hand, started sending other warriors to Yamaloka with his arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)