श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  10.8.80 
अपेतशस्त्रसन्नाहान् सन्नद्धान् पाण्डुसृंजयान्।
प्राहिणोन्मृत्युलोकाय द्रौणि: प्रहरतां वर:॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
पाण्डवों और सृंजयों में से जिन लोगों ने अपने अस्त्र-शस्त्र और कवच उतार फेंके थे और जिन लोगों ने पुनः कवच धारण कर लिए थे, वे सब योद्धाओं में श्रेष्ठ द्रोणपुत्र ने मृत्युलोक में भेज दिए ॥80॥
 
Those among the Pandavas and Srinjayas who had thrown off their weapons and armour, and those who had put on their armour again, were all sent to the world of death by Drona's son, the best of all assault warriors. ॥ 80॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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