Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 10.8.8-9h: ‘मैं इस शिविर में प्रवेश करके मृत्यु के समान घूमूँगा। तुम लोग ऐसा काम करो कि कोई भी मनुष्य तुम्हारे हाथ से जीवित बच न सके, यह मेरा दृढ़ निश्चय है।’ ॥8 1/2॥ | mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध । mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अहं प्रवेक्ष्ये शिबिरं चरिष्यामि च कालवत्।
यथा न कश्चिदपि वा जीवन् मुच्येत मानव:॥ ८॥
तथा भवद्भ्यां कार्यं स्यादिति मे निश्चिता मति:।
अनुवाद
‘मैं इस शिविर में प्रवेश करके मृत्यु के समान घूमूँगा। तुम लोग ऐसा काम करो कि कोई भी मनुष्य तुम्हारे हाथ से जीवित बच न सके, यह मेरा दृढ़ निश्चय है।’ ॥8 1/2॥
‘I will enter this camp and roam around there like death. You people should do such a thing that no person can escape alive from your hands, this is my firm decision.' ॥ 8 1/2 ॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥