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श्लोक 10.8.8-9h  |
अहं प्रवेक्ष्ये शिबिरं चरिष्यामि च कालवत्।
यथा न कश्चिदपि वा जीवन् मुच्येत मानव:॥ ८॥
तथा भवद्भ्यां कार्यं स्यादिति मे निश्चिता मति:। |
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| अनुवाद |
| ‘मैं इस शिविर में प्रवेश करके मृत्यु के समान घूमूँगा। तुम लोग ऐसा काम करो कि कोई भी मनुष्य तुम्हारे हाथ से जीवित बच न सके, यह मेरा दृढ़ निश्चय है।’ ॥8 1/2॥ |
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| ‘I will enter this camp and roam around there like death. You people should do such a thing that no person can escape alive from your hands, this is my firm decision.' ॥ 8 1/2 ॥ |
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