श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  10.8.78 
अत्युग्रप्रतिपिष्टैश्च नदद्भिश्च भृशोत्कटै:।
गजाश्वमथितैश्चान्यैर्मही कीर्णाभवत् प्रभो॥ ७८॥
 
 
अनुवाद
वे सब-के-सब बुरी तरह कुचले गए और पागलों की तरह ज़ोर-ज़ोर से चीख़ने-चिल्लाने लगे। इसी प्रकार पीछे छूटे घोड़ों और हाथियों ने भी बहुत से योद्धाओं को कुचल डाला। हे प्रभु! उन सबकी लाशों से ज़मीन पट गई। 78.
 
All of them were crushed terribly, and were screaming and shouting loudly as if they were mad. Similarly, the horses and elephants that were left behind crushed many other warriors. O Lord! The ground was covered with the corpses of all of them. 78.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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