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श्लोक 10.8.76  |
ततस्तेन निनादेन प्रत्यबुद्धॺन्त धन्विन:।
शिबिरे पाण्डवेयानां शतशोऽथ सहस्रश:॥ ७६॥ |
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| अनुवाद |
| तत्पश्चात् अश्वत्थामा की सिंह गर्जना से पाण्डवों के शिविर में उपस्थित सैकड़ों-हजारों वीर धनुर्धर जाग उठे। |
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| Thereafter, hundreds and thousands of brave archers in the camp of Pandavas woke up due to the roar of Ashwatthama's lion. |
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