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mahabharat 10.8.75: पूर्वकाल में देखे हुए स्वप्नों को स्मरण करके वे वीर पुरुष यह मानने लगे कि वही स्वप्न इस रूप में साकार हो रहा है ॥ 75॥   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  10.8.75 
तदनुस्मृत्य ते वीरा दर्शनं पूर्वकालिकम्।
इदं तदित्यमन्यन्त दैवेनोपनिपीडिता:॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
पूर्वकाल में देखे हुए स्वप्नों को स्मरण करके वे वीर पुरुष यह मानने लगे कि वही स्वप्न इस रूप में साकार हो रहा है ॥ 75॥
 
Remembering the dreams they had seen in the past, those brave men began to believe that the same dream was coming true in this form. ॥ 75॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)