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mahabharat 10.8.7: यदि तुम दोनों सावधानी से प्रयत्न करो, तो तुम सब क्षत्रियों का नाश करने के लिए पर्याप्त हो। फिर इन बचे हुए योद्धाओं को और विशेषतः सोए हुए योद्धाओं को मारने में क्या बड़ी बात है?॥7॥   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  10.8.7 
यत्तौ भवन्तौ पर्याप्तौ सर्वक्षत्रस्य नाशने।
किं पुनर्योधशेषस्य प्रसुप्तस्य विशेषत:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
यदि तुम दोनों सावधानी से प्रयत्न करो, तो तुम सब क्षत्रियों का नाश करने के लिए पर्याप्त हो। फिर इन बचे हुए योद्धाओं को और विशेषतः सोए हुए योद्धाओं को मारने में क्या बड़ी बात है?॥7॥
 
If you both try with caution, you are enough to destroy all the Kshatriyas. Then what is the big deal in killing these remaining warriors and especially those who are sleeping?॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)