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mahabharat 10.8.65-66: इस प्रकार शिखण्डी का वध करके शत्रुओं को पीड़ा पहुँचाने वाले अश्वत्थामा ने क्रोध में भरकर समस्त प्रभद्रकों पर बड़े वेग से आक्रमण किया। इसके साथ ही उसने राजा विराट की शेष सेना पर भी बड़े वेग से आक्रमण किया।   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 65-66
 
 
श्लोक  10.8.65-66 
शिखण्डिनं ततो हत्वा क्रोधाविष्ट: परंतप:॥ ६५॥
प्रभद्रकगणान् सर्वानभिदुद्राव वेगवान्।
यच्च शिष्टं विराटस्य बलं तु भृशमाद्रवत्॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार शिखण्डी का वध करके शत्रुओं को पीड़ा पहुँचाने वाले अश्वत्थामा ने क्रोध में भरकर समस्त प्रभद्रकों पर बड़े वेग से आक्रमण किया। इसके साथ ही उसने राजा विराट की शेष सेना पर भी बड़े वेग से आक्रमण किया।
 
Having killed Shikhandi in this manner, Ashvatthama, the tormentor of enemies, filled with rage, attacked all the Prabhadrakas with great vigour. Along with that, he also attacked the remaining army of King Virata with great vigour.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)