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श्लोक 10.8.61  |
तेन शब्देन वीरस्तु श्रुतकीर्तिर्महारथ:।
अश्वत्थामानमासाद्य शरवर्षैरवाकिरत्॥ ६१॥ |
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| अनुवाद |
| कोलाहल सुनकर वीर योद्धा श्रुतकीर्ति अश्वत्थामा के पास आये और उस पर बाणों की वर्षा करने लगे। |
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| Hearing the uproar, the valiant warrior Shrutakirti came near Ashvatthama and started showering arrows upon him. |
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