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mahabharat 10.8.6: महाराज! उन दोनों महारथियों को अपना साथ देने का प्रयत्न करते देख अश्वत्थामा बहुत प्रसन्न हुआ। उसने उनसे धीरे से इस प्रकार कहा-॥6॥   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  10.8.6 
अश्वत्थामा तु तौ दृष्ट्वा यत्नवन्तौ महारथौ।
प्रहृष्ट: शनकै राजन्निदं वचनमब्रवीत्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उन दोनों महारथियों को अपना साथ देने का प्रयत्न करते देख अश्वत्थामा बहुत प्रसन्न हुआ। उसने उनसे धीरे से इस प्रकार कहा-॥6॥
 
Maharaj! Seeing those two great warriors trying to support him, Ashwatthama was very happy. He softly told them like this -॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)