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mahabharat 10.8.58: जब शतानीक ने अपना चक्र फेंका, तो ब्राह्मण अश्वत्थामा ने भी उस पर ज़ोरदार प्रहार किया। इससे व्याकुल होकर वह ज़मीन पर गिर पड़ा। तब अश्वत्थामा ने उसका सिर काट दिया।   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  10.8.58 
अताडयच्छतानीकं मुक्तचक्रं द्विजस्तु स:।
स विह्वलो ययौ भूमिं ततोऽस्यापाहरच्छिर:॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
जब शतानीक ने अपना चक्र फेंका, तो ब्राह्मण अश्वत्थामा ने भी उस पर ज़ोरदार प्रहार किया। इससे व्याकुल होकर वह ज़मीन पर गिर पड़ा। तब अश्वत्थामा ने उसका सिर काट दिया।
 
When Satanika threw his discus, the Brahmin Ashwatthama also struck him hard. Distressed by this, he fell to the ground. Ashwatthama then beheaded him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)