श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  10.8.56 
सुतसोमस्य सासिं तं बाहुं छित्त्वा नरर्षभ।
पुनरप्याहनत् पार्श्वे स भिन्नहृदयोऽपतत्॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! तब अश्वत्थामा ने तलवार से सुतसोम की भुजा काट डाली और पुनः उसकी पसलियों में घोंप दिया। इससे उसकी छाती फट गई और वह गिर पड़ा॥ 56॥
 
O best of men! Then Ashvatthama cut off Sutasoma's arm with his sword and again stabbed him in the ribs. This tore his chest apart and he fell down.॥ 56॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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