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श्लोक 10.8.56  |
सुतसोमस्य सासिं तं बाहुं छित्त्वा नरर्षभ।
पुनरप्याहनत् पार्श्वे स भिन्नहृदयोऽपतत्॥ ५६॥ |
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| अनुवाद |
| हे पुरुषश्रेष्ठ! तब अश्वत्थामा ने तलवार से सुतसोम की भुजा काट डाली और पुनः उसकी पसलियों में घोंप दिया। इससे उसकी छाती फट गई और वह गिर पड़ा॥ 56॥ |
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| O best of men! Then Ashvatthama cut off Sutasoma's arm with his sword and again stabbed him in the ribs. This tore his chest apart and he fell down.॥ 56॥ |
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