Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 10.8.51-53h: तत्पश्चात्, अपने पिता की हत्या का स्मरण करके वह अत्यन्त क्रोधित हो गया और रथ के आसन से उतरकर, बड़ी शीघ्रता से युद्ध-कुल्हाड़ी की ओर दौड़ा। उसके हाथ में हजारों अर्द्धचन्द्राकार चिह्नों से युक्त एक चमकती हुई ढाल और सोने से मढ़ी हुई एक दिव्य एवं शुद्ध तलवार थी। | mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध । mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात्, अपने पिता की हत्या का स्मरण करके वह अत्यन्त क्रोधित हो गया और रथ के आसन से उतरकर, बड़ी शीघ्रता से युद्ध-कुल्हाड़ी की ओर दौड़ा। उसके हाथ में हजारों अर्द्धचन्द्राकार चिह्नों से युक्त एक चमकती हुई ढाल और सोने से मढ़ी हुई एक दिव्य एवं शुद्ध तलवार थी।
Thereafter, remembering the murder of his father, he became very angry and, descending from the seat of the chariot, he rushed towards the battle-axe in great haste, holding a shining shield marked with thousands of crescent-shaped symbols and a divine and pure sword adorned with gold.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥