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श्लोक 10.8.5  |
संजय उवाच
तस्मिन् प्रयाते शिबिरं द्रोणपुत्रे महात्मनि।
कृपश्च कृतवर्मा च शिविरद्वार्यतिष्ठताम्॥ ५॥ |
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| अनुवाद |
| संजय ने कहा- हे राजन! जब महामना द्रोणपुत्र अश्वत्थामा शिविर के अन्दर जाने लगे, तो कृपाचार्य और कृतवर्मा भी उनके द्वार पर खड़े हो गये। |
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| Sanjaya said- O King! When the great-hearted Drona's son Ashwatthama started going inside the camp, Krupacharya and Kritavarma also stood at his door. |
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