श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  10.8.5 
संजय उवाच
तस्मिन् प्रयाते शिबिरं द्रोणपुत्रे महात्मनि।
कृपश्च कृतवर्मा च शिविरद्वार्यतिष्ठताम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा- हे राजन! जब महामना द्रोणपुत्र अश्वत्थामा शिविर के अन्दर जाने लगे, तो कृपाचार्य और कृतवर्मा भी उनके द्वार पर खड़े हो गये।
 
Sanjaya said- O King! When the great-hearted Drona's son Ashwatthama started going inside the camp, Krupacharya and Kritavarma also stood at his door.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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